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हद को पार करने दूं

                
                                                         
                            दिल है ऐसा निकाल कर दे दूं
                                                                 
                            
वक्त इतना नहीं कहीं देखूं
आइने से बहुत ,लगाव मुझे
इसके टुकड़े हुए कहां फेंकूं
सर्द लहजे हैं इस जमाने के
भाप उठती,तेरे रुखसारों से
हाथ गलते हैं, मैं किधर सेकूं
आज हर छूट दे दिया इसको
ये जो चाहे वो आज करने दूं
आ ही जाती है सामने अक्सर
खुद को इस हद को पार करने दूं
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4 महीने पहले

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