तेरा खयाल दिल से भुलाना भी है मुझे
यानी की अपना जख्म छुपाना भी है मुझे
मेरी वजह से जितना ये मंजर उदास है
खुद हंसना है और इसको हंसाना भी है मुझे
ये दिल हुआ भारी,फकत तेरे खयाल से
है और कितना बोझ उठाना भी है मुझे
सर अपने उठाती ही जा रही हैं उलझनें
है कोई आसमान झुकाना भी है मुझे
इठला रही है दूर तलक कोई खोमोशी
अय्याम ए गर्दिश को रुलाना भी है मुझे
रुखसत किया था मुझको चमन से बहार ने
उसे पछतावा इंतजार है जाना भी है मुझे
सदियों से है बंजर सी मोहब्बत की ये ज़मीं
उल्फ़त की फसल इसमें उगाना भी है मुझे