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दिल का गुबार निकल जाता है सुनाने से

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फासले मिटते रहे दूर और जाने से
        
                                                    
                            
दूरियां बढ़ती रहीं जबकि पास आने से
जिस भी तारे को बहुत देर गौर से देखा
वही मुकरने लगा और झिलमिलाने से
आसमां से मोहब्बतें मेरी अच्छी न हुईं
बिजलियां गिराने लगा मेरे आशियाने पे
जो गुजर जाता है अनजान हवा सा कभी
फर्क क्या होगा उसे मेरे गुजर जाने से
पत्थरों से भी कभी बात किया करता हूं
दिल का गुबार निकल जाता है सुनाने से
एक महीने पहले
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