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दिल का गुबार निकल जाता है सुनाने से

                
                                                         
                            फासले मिटते रहे दूर और जाने से
                                                                 
                            
दूरियां बढ़ती रहीं जबकि पास आने से
जिस भी तारे को बहुत देर गौर से देखा
वही मुकरने लगा और झिलमिलाने से
आसमां से मोहब्बतें मेरी अच्छी न हुईं
बिजलियां गिराने लगा मेरे आशियाने पे
जो गुजर जाता है अनजान हवा सा कभी
फर्क क्या होगा उसे मेरे गुजर जाने से
पत्थरों से भी कभी बात किया करता हूं
दिल का गुबार निकल जाता है सुनाने से
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8 मिनट पहले

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