विज्ञापन

बदनाम होकर रह गया

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो मेरा आगाज था,अंजाम होकर रह गया
        
                                                    
                            
मैं तुम्हारे शहर में गुमनाम होकर रह गया
तुमने मुझपर की नजर तो शोहरतें हासिल हुईं
तुमने ठुकराया तो मैं बदनाम होकर रह गया
जख्म अपनों से मिले वो आज भी नासूर हैं
दुश्मनों के घाव से आराम होकर रह गया
दिखता होगा चांद भी छत पर तुम्हारे रोज ही
जो अधूरे प्यार का पैगाम होकर रह गया
इक कहानी आजतक भी है अधूरी इसतरह
कोई किस्सा उस तरह तमाम होकर रह गया
जगाकर दुश्वारियों को सो गई किस्मत मेरी
लफ़्ज़ हर तारीफ का इल्जाम होकर रह गया
25 मिनट पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

jagdish bhandari

14 कविताएं

View Profile