विज्ञापन

उड़ाएँगे सब हँसी

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोना है आँसुओं को छुपाना भी है यहाँ
        
                                                    
                            
हर हाल मुस्कुरा के दिखाना भी है यहाँ।

*इज़हार* हो न ग़म का उड़ाएँगे सब हँसी
दामन को पाक़ साफ़ बचाना भी है यहाँ।

मुश्किल सभी के पास है मुश्किल पे वार कर
दिल हारना है जश्न मनाना भी है यहाँ।

ज़ेवर हैं अश्क़ आँख में रखना सँभाल कर
अपने ही दिल को आप सजाना भी है यहाँ।

बिख़री हुई ख़ुशी को हमेशा समेट कर
इन से ही ताल मेल बिठाना भी है यहाँ।

बच्चे शहर में जाके मुझे भूल ही गए
बच्चों को ला के गाँव घुमाना भी है यहाँ।

घबरा के मुँह न फेर अनिल इन ग़मों से तू
रिश्ता सभी के साथ निभाना भी है यहाँ।

- पंडित अनिल
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile