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उड़ाएँगे सब हँसी

                
                                                         
                            रोना है आँसुओं को छुपाना भी है यहाँ
                                                                 
                            
हर हाल मुस्कुरा के दिखाना भी है यहाँ।

*इज़हार* हो न ग़म का उड़ाएँगे सब हँसी
दामन को पाक़ साफ़ बचाना भी है यहाँ।

मुश्किल सभी के पास है मुश्किल पे वार कर
दिल हारना है जश्न मनाना भी है यहाँ।

ज़ेवर हैं अश्क़ आँख में रखना सँभाल कर
अपने ही दिल को आप सजाना भी है यहाँ।

बिख़री हुई ख़ुशी को हमेशा समेट कर
इन से ही ताल मेल बिठाना भी है यहाँ।

बच्चे शहर में जाके मुझे भूल ही गए
बच्चों को ला के गाँव घुमाना भी है यहाँ।

घबरा के मुँह न फेर अनिल इन ग़मों से तू
रिश्ता सभी के साथ निभाना भी है यहाँ।

- पंडित अनिल
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2 वर्ष पहले

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