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बस दो पल का साथ

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत कुछ चाहिए था ज़िंदगी से,
        
                                                    
                            
लेकिन ज़िंदगी ने धीरे-धीरे समझा दिया—
सबसे कीमती चीज़ पैसा नहीं,
किसी अपने का साथ होता है।

हम उम्रभर कमाते रहे,
घर बनाते रहे,
रिश्ते निभाते रहे...
और फिर एक दिन पीछे मुड़कर देखा,
तो समझ आया—
जिसके लिए इतना कुछ कमाया,
उसके साथ बैठकर दो पल जीना ही भूल गए।

काश...
वो पुराने दिन फिर लौट आते,
जब जेब में पैसे कम थे,
लेकिन दिल में सुकून बहुत था।

कुछ दोस्त थे,
कुछ अपने थे,
बिना किसी मतलब के मिलने वाले लोग थे,
और घंटों बातें होती थीं...
हँसी भी सच्ची थी,
आँसू भी अपने थे।

आज सब कुछ है...
लेकिन वो लोग नहीं हैं।

कोई दूर चला गया,
कोई वक्त के साथ बदल गया,
और कोई ऐसा भी था
जिसे हमने यह सोचकर टाल दिया—
"फिर कभी मिल लेंगे..."

वो फिर कभी
कभी आया ही नहीं।

इसलिए अगर आज कोई अपना
आपके पास बैठा है,
आपसे बातें करना चाहता है,
आपके साथ हँसना चाहता है...

तो अपना फोन रख दीजिए,
अपनी व्यस्तता छोड़ दीजिए,
और उसके साथ दो पल बैठ जाइए।

क्योंकि...

पैसा फिर कमाया जा सकता है,
समय कभी वापस नहीं आता।

जो पल आज आपके पास हैं,
कल सिर्फ याद बन सकते हैं।

और यकीन मानिए...

ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव पर
इंसान यह नहीं सोचता कि
काश मेरे पास और पैसा होता...

वह सोचता है—

काश...
उन अपनों के साथ
थोड़ा और वक्त बिताया होता।
थोड़ा और हँसा होता।
थोड़ा और प्यार किया होता।
बस... दो पल और साथ बैठा होता। 

क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी दौलत
वह नहीं जो तिजोरी में बंद हो,
बल्कि वह है—
जो किसी अपने के साथ बिताए
दो खूबसूरत पलों में मिल जाए। 
9 घंटे पहले
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