ऊँची इमारतों के बीच,
यह छोटा सा संसार है,
मिट्टी की खुशबू में बसता,
प्रकृति का सुंदर प्यार है।
बालकनी की जाली के पीछे,
दिखता जग का सुंदर रूप,
नीले जल और हरे पेड़ों में,
मुस्काता जीवन का स्वरूप।
इन छोटे-छोटे गमलों में,
मेरे सपनों का वास है,
हर पत्ती, हर नई कोंपल में,
जीवन का मधुर एहसास है।
कोई बेल सहारे बढ़ती,
कोई चुपचाप खिल जाती है,
सूखी मिट्टी को छूते ही,
बारिश की याद दिलाती है।
भागती-दौड़ती दुनिया में,
यह मेरा शांत किनारा है,
पेड़-पौधों की हरियाली ने,
मन को खूब सँवारा है।
जहाँ प्रेम से पौधे पलते हैं,
वहाँ खुशियों का घर होता है,
प्रकृति से जो रिश्ता जोड़ ले,
उसका जीवन सुंदर होता है।