विज्ञापन

किससे आस लगाएँ

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या पता चलते-फिरते हम कब पितर बन जाएंँ।
        
                                                    
                            
क्षणभंगुर जीवन में क्या ही किससे आस लगाएँ।।
-पंडित अनिल
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

461 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10782 कविताएं

View Profile