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करार सावन का

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करार सावन का
        
                                                    
                            

बरस में इक ही दफा है बहार सावन का
तुम्हीं तो भूल गए हो करार सावन का।

सजन ये झूठ पे जो झूठ बोलते हो तुम
कभी हो जाओगे तुम भी शिकार सावन का।

घिरे हैं मेघ ये काले नज़र लगा देंगे
चढ़ा के मानेंगे मुझपे बुखार सावन का।

रहे न याद ज़माने की बात कुछ भी मगर
न भूलता है कभी पहला प्यार सावन का।

खिले-खिले से चमन हैं अनिल जिधर देखो
इसी को कहते हैं असली ख़ुमार सावन का।
-पंडित अनिल
11 घंटे पहले
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