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इनायत है

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इनायत है
        
                                                    
                            

मुझसे हर शख़्श को शिकायत है
कितनी लोगों के पास फुर्सत है।

फिर भी हँसता हूँ मस्त रहता हूँ
मुझ पे रब्बा तिरी इनायत है।

अंजुमन में ये क्यों है ख़ामोशी
हाल सबका सही सलामत है?

जो है हासिल बुरा लगे सबको
जो न हासिल है खूबसूरत है।

जब तलक तू निबाह कर ले अनिल
तब तलक ही तिरी जरूरत है।
-पंडित अनिल
18 घंटे पहले
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