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इनायत है

                
                                                         
                            इनायत है
                                                                 
                            

मुझसे हर शख़्श को शिकायत है
कितनी लोगों के पास फुर्सत है।

फिर भी हँसता हूँ मस्त रहता हूँ
मुझ पे रब्बा तिरी इनायत है।

अंजुमन में ये क्यों है ख़ामोशी
हाल सबका सही सलामत है?

जो है हासिल बुरा लगे सबको
जो न हासिल है खूबसूरत है।

जब तलक तू निबाह कर ले अनिल
तब तलक ही तिरी जरूरत है।
-पंडित अनिल
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11 घंटे पहले

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