आंधियों में भी शमां गम की जला करती है,
बिना मांगे खुशी किस्मत से मिला करती,
कभी भी मौत बिन बहाने के नहीं आती,
जिंदगी उम्र के पांवों से चला करती है।
जिंदगी मौत जुड़वा बहने एक दूजे की,
जिंदगी मौत भी आपस में जला करती है
एक आती है तो फिर दूरी चली जाती है।
म्यान में एक ही तलवार रहा करती है।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट ग्वालियर मध्यप्रदेश