विज्ञापन

शोषित का भी शोषण करते

Anand gurjar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या करना है क्या धरना है
        
                                                    
                            
सबको ही एक दिन मरना है,
फिर क्यों छीने किसी की रोटी
मेहनत से जो मिले तमाम ।

जुटा रहे हैं हम भी वैभव
चाहे तन ढाका हो हाफ,
दुःख सहकर हम मर जाएंगे
न जिए जिंदगी सुखी तमाम ।

शोषित का भी शोषण करते
हम जग में पागल से फिरते,
हम गरीब मजदूरों का भी
खून चूसते आठों याम ।

जीवन यूं ही गवाया हमने
चलते रहे भेड़ सी चाल,
पागल मानव हुआ सहोदर
क्यों पीता है झूठा जाम ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile