विज्ञापन

नगर महानगर का चौराहा

Anand gurjar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जान जलेबी के चक्कर में
        
                                                    
                            
उसकी चाहे चली जाएगी,
पर पागल है नहीं छोड़ता
ले लेता है बिना दाम ।

नगर महानगर का चौराहा
या चाहे हो कोई गांव,
बैठा पत्थर फेंक रहा है
अरबर बकता रहा तमाम ।

दुनिया में वह सबसे अच्छा
सबसे झूठा सबसे सच्चा,
कभी हंसना कभी रोता
उसका है पागल जो नाम ।

दुनिया में तू ही तो एक है
तू ही प्यार बड़ा नेक है,
एक बार में भी तो पागल
हो जाऊं पी करके जाम ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile