दिल के लफ़्ज़ों पे वक्त की कयादत होगी ।
जहां तेरा लहू गिरेगा वहां मेरी शहादत होगी ।।
किसी गरीब के वोटों की नहीं है कीमत ।
फिर इसी बात को लेकर के सियासत होगी ।
अपने वादों से मुकर गए हो तुम ।
बस इसी बात को लेकर के बग़ावत होगी ।
किसी ख्वाब में मैंने भी उजाला देखा ।
अंधेरी रात में जूगनू की शराफ़त होगी ।।
बहुत मुश्किल है सहोदर यहां सफ़र करना ।
इतनी मंहगाई में मुश्किल से गुजारत होगी ।।
- आनन्द गुर्जर सहोदर