विज्ञापन

यकीनन उन्हीं की नजर में कमी है

Anand gurjar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी जिन्दगी में बस इक तुही है,
        
                                                    
                            
तेरे प्यार की जरूरत बडी है !

तेरे दिल में क्या है मुझे भी बतादे,
मेरी जिन्दगी में बडी बेबसी है !

न मजदूर को इतना मजबूर कर,
एक-एक दाने की उसको पड़ी है !

कि मंहगाई इतनी ज्यादा बडी है,
गरीबों के सिर पे मुसीबत खड़ी है !

यह सरकार मुझको समझेंगे कैसे,
यकीनन उन्हीं की नजर में कमी है

- आनन्द गुर्जर सहोदर
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all