मेरी जिन्दगी में बस इक तुही है,
तेरे प्यार की जरूरत बडी है !
तेरे दिल में क्या है मुझे भी बतादे,
मेरी जिन्दगी में बडी बेबसी है !
न मजदूर को इतना मजबूर कर,
एक-एक दाने की उसको पड़ी है !
कि मंहगाई इतनी ज्यादा बडी है,
गरीबों के सिर पे मुसीबत खड़ी है !
यह सरकार मुझको समझेंगे कैसे,
यकीनन उन्हीं की नजर में कमी है
- आनन्द गुर्जर सहोदर
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