विज्ञापन

कौन कब रुकता है

Anand Chaurasiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            संसार की इस दुनिया में कौन कब रुकता है
        
                                                    
                            
कौन कब जुड़ता है कौन कब करता है
कौन क्या कहता है कौन क्या सुनता है
संसार की इस विडम्बना को क्या मैं समझाऊंगा
जो तुम जानते हो वही मैं सुनाऊंगा
संसार में कोई नहीं किसी के लिए न रुकता है
न रुकता है ना थकता है मैं तड़पता हूँ
यह निकलता है बस में अपनी जिंदगी करता है
संसार तो संसार है ना जीवन के दौर में संसार जैसा प्यार है अपनों के लिए ही अपना आधार है
अपनों का ही प्यार है दूसरों का सब तो सब मौज लेते हैं
यह जीवन नहीं होता उनका संसार सब अपना ही लाते हैं
सब मौज से सुनता नहीं कौन है
किसी का क्या है रिश्ता कैसा है
सभी गुड है तो वो जाने कैसे कौन थे
वह सब लोग मानते हैं जो देखे थे
सबको तड़पते हैं लोग मगर फिर रुकते नहीं है
किसी के लिए कौन मगर कहते हैं
सभी एक हैं कहते हैं सभी
एक जैसा प्यार है दिखता नहीं सुनता कौन है
फिर भी से समान है देखते सब है बोलते हैं कौन है
सूनी पड़ी राहों में दिखता कौन है
होते बलात्कार रात दिन तब सब जागते हैं
वह कौन था वह कौन था चिल्लाते हैं सभी
जब बोलना था बोलते नहीं बाद मे चिलाते है सभी
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Chandra prakash

28 कविताएं

View Profile