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कौन कब रुकता है

                
                                                         
                            संसार की इस दुनिया में कौन कब रुकता है
                                                                 
                            
कौन कब जुड़ता है कौन कब करता है
कौन क्या कहता है कौन क्या सुनता है
संसार की इस विडम्बना को क्या मैं समझाऊंगा
जो तुम जानते हो वही मैं सुनाऊंगा
संसार में कोई नहीं किसी के लिए न रुकता है
न रुकता है ना थकता है मैं तड़पता हूँ
यह निकलता है बस में अपनी जिंदगी करता है
संसार तो संसार है ना जीवन के दौर में संसार जैसा प्यार है अपनों के लिए ही अपना आधार है
अपनों का ही प्यार है दूसरों का सब तो सब मौज लेते हैं
यह जीवन नहीं होता उनका संसार सब अपना ही लाते हैं
सब मौज से सुनता नहीं कौन है
किसी का क्या है रिश्ता कैसा है
सभी गुड है तो वो जाने कैसे कौन थे
वह सब लोग मानते हैं जो देखे थे
सबको तड़पते हैं लोग मगर फिर रुकते नहीं है
किसी के लिए कौन मगर कहते हैं
सभी एक हैं कहते हैं सभी
एक जैसा प्यार है दिखता नहीं सुनता कौन है
फिर भी से समान है देखते सब है बोलते हैं कौन है
सूनी पड़ी राहों में दिखता कौन है
होते बलात्कार रात दिन तब सब जागते हैं
वह कौन था वह कौन था चिल्लाते हैं सभी
जब बोलना था बोलते नहीं बाद मे चिलाते है सभी
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1 hour ago

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