वो आया ही था , जाने के लिए !!
वो जाने वाला मुसाफिर था , इक रात का मेहमान भर
फिर भी आंख भर आई तो क्या करें उसके जाने पर !!
दिल को जाने क्यूँ भरम हुआ !
मुहब्बत कर बैठा , उस अजनबी से तो क्या करें !
वो आया ही था जाने के लिए !!
रोकते भी हम तो कोई हक न था !
रुका था बस वो बारिश भरी रात में !
सर छिपाने के लिए !
वो आया ही था , जाने के लिए !!