अमीर -- गरीब के बीच पिसता जो इंसान है
मध्यवर्गीय उसका नाम है !
ज़माने के साथ चले तो कैसे चले
न चल पाए तो भी जीना मुश्किल रहे!!
प्रतियोगिता की आपाधापी में
बच्चों का ऊंची स्कूल में दाखिला
आधुनिकता से भरे समाज में कदम से कदम मिलना
इन सब को पूरा करते करते वो मध्यवर्गीय
खुद को कब खो देता है उसे खुद पता नहीं चलता
बस रह जाते है इनकी आंखों में वो सपने
जो शायद ज़िंदगी के किसी मोड़ पे इनकी आंखों ने भी
देखे होंगे !!