आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कमर तोड़ती है , इनका गरीबी

                
                                                         
                            अमीर -- गरीब के बीच पिसता जो इंसान है
                                                                 
                            
मध्यवर्गीय उसका नाम है !
ज़माने के साथ चले तो कैसे चले
न चल पाए तो भी जीना मुश्किल रहे!!
प्रतियोगिता की आपाधापी में
बच्चों का ऊंची स्कूल में दाखिला
आधुनिकता से भरे समाज में कदम से कदम मिलना
इन सब को पूरा करते करते वो मध्यवर्गीय
खुद को कब खो देता है उसे खुद पता नहीं चलता
बस रह जाते है इनकी आंखों में वो सपने
जो शायद ज़िंदगी के किसी मोड़ पे इनकी आंखों ने भी
देखे होंगे !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर