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कदम बढ़ाऊं किस पथ पे ।

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं भी तुझ पे यक़ीन करना चाहती हूं
        
                                                    
                            
तू पत्थरों में बसता है या जल के कलरव
में झलकता है ।
तू हवाओ में बहता है या बसंत बहार में थिरकता है।
तू ज्वाला बन धधकता है या ओस की बूंदों में
ठहरता है ।
तू किस रूप में किस रंग में ढलता है
हर कण में हर तरंग में तेरा अस्तित्व उभरता है
पर में कैसे करूं तुझ पे यक़ीन
मुझे मेरे साये के अलावा क्यों कोई
मेरे साथ नहीं तू भी नहीं दिखता है
कदम बढ़ाऊं किस पथ पे जब तू भी
मेरा हाथ नहीं पकड़ता है।
7 घंटे पहले
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