गुमनाम हूं मैं , क्योंकि चमक के इस दौर में
मै चमकीली न बन सकीं , लिपटी हुई है आज भी
मुझ में वही पुरानी साधारण शख्सियत
जो किसी महफ़िल में चर्चा का विषय
बनने के लिए लालायित भी नहीं