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हम सब तो कठपुतलियां हैं

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम सब तो कठपुतलियां हैं
        
                                                    
                            
हमारी डोर तो हमारे रचनाकार
अर्थात विधाता के हाथों में है
अच्छे कर्म करने की छूट दी गई है हमें
हमारे इन्हीं कर्मों से हमारा हिसाब -- किताब
लिखा जाता है , कब तक रहना है इस धरा पर
क्या करना है क्या नहीं सब पहले से तय है
हा , हमारे कर्म हमे जरूर कुछ हक जरूर
दिला देते है बस यही कारण है कि कुछ
कठपुतलियों के नाम स्वर्ण अक्षरों में
अंकित हो जाते हैं !!
7 महीने पहले
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