किसी ने पूछा, “आपको इश्क़ नहीं हुआ कभी?”
हमने भी बिना सोचे कहा, “नहीं!”
सामने वाला मुस्कुराया, फिर पूछा, “क्यों जनाब?”
हमने कहा, ज़रा सुनिए हमारा भी जबाब।
ज़िन्दगी ने ही हमें इतना उलझा दिया,
दिल और दिमाग़, दोनों को थका दिया।
उस गली में लोगों को परेशा देखा,
इश्क़ में हँसते चेहरों को भी जिन्दगी से रुसवा देखा।
सोचा, हम तो पहले ही ज़िन्दगी से हारे हैं,
क्यों जाएँ उस गली में, जहाँ ग़म ही ग़म के नज़ारे हैं।
हम तो वैसे ही मुश्किलों के मारे हैं,
ज़िन्दगी की जंग अभी तक नही हारे हैं।
इश्क़ की जंग लड़ने की अब हिम्मत नहीं,
ज़िन्दगी से ही फ़ुर्सत नहीं, इसलिए कभी इश्क़ से मुलाकात नही ।