विज्ञापन

जब तक चले,तब तक चले...

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "जब तक चले, तब तक चले..."
        
                                                    
                            

कुछ अपने होकर दूर मिले,
कुछ राहों में मजबूर मिले,
कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए,
कुछ ख़्वाब मगर मशहूर मिले।

कुछ चेहरे दिल में रह गए,
कुछ चेहरे वक़्त के साथ ढल गए,
हम ढूँढ़ते रहे ख़ुद को मगर,
हर मोड़ पर कुछ निशाँ मिले।

आवारगी भी अपनी थी,
और रास्ते भी अपने थे,
हम मंज़िल की तलाश में निकले,
तो कितने मौसम हमसे मिले।

कभी धूप मिली, कभी छाँव मिली,
कभी दर्द मिला, कभी दुआ मिली,
जो खोया, उसने जीना सिखाया,
जो पाया, उसने वजह दी।

"मेरा भी एक वक़्त है,
और तेरा भी एक वक़्त
ये ज़िंदगी भी एक सफ़र है,
बात तो बस इतनी-सी है…
जब तक चले, तब तक चले।"

अब कहाँ रहे वो घोंसले,
जिनमें उम्मीदें पलती थीं,
अब कहाँ गईं वो मासूमियाँ,
जिनसे रातें भी ढलती थीं।

कुछ फ़ासले चुपचाप बढ़े,
कुछ रिश्ते ख़ामोशी में टूट गए,
कुछ लोग हमारे होकर भी,
हमसे जाने क्यों रूठ गए।

जिनकी फ़ितरत ही पत्थर हो,
उनसे दिल का गिला क्या करना,
जो रोशनी से आँखें मूँद लें,
उनसे उजालों की दुआ क्या करना।

तू चल, ऐ दिल… तू चलता रह,
हर दर्द को अपना गीत कह।
जो छूट गया, उसे जाने दे,
जो मिल गया, उसे प्रीत कह।

गिरना भी तेरी कहानी है,
संभलना भी तेरी निशानी है,
हर ज़ख़्म को कमज़ोरी मत समझ,
कुछ दर्द ही तेरी रवानी हैं।

जो रात मिली, वो कट जाएगी,
जो आँधी है, वो थम जाएगी,
तू बस अपने दीप को जलाए रख
एक सुबह फिर मुस्काएगी।

हर हार में सबक़ छुपा है,
हर आँसू में एक दुआ है,
हर ठोकर कहती है तुझसे
"अभी सफ़र कहाँ पूरा हुआ है।"

कल क्या होगा, किसने जाना,
आज को मगर बेकार न जाने दे।
जो साँस मिली है, उसे जी ले,
जो प्रेम मिला है, उसे बाँट दे।

न कोई हमेशा साथ रहेगा,
न कोई हमेशा दूर रहेगा,
वक़्त का पहिया चलता रहेगा,
हर मौसम एक दिन बदलता रहेगा।

"मेरा भी एक वक़्त है,
और तेरा भी एक वक़्त
न शिकवा कर, न हिसाब रख,
जो मिला, उसे दिल से जी…
जो गया, उसे मुस्कुराकर विदा कर।"

क्योंकि ज़िंदगी कोई वादा नहीं,
बस पल-पल बहती एक धारा है,
कभी तू किनारा, कभी मैं किनारा
और बीच में वक़्त हमारा है।

तो चल…
जब तक साँस है, उम्मीद रहे,
जब तक दिल है, धड़कन रहे,
जब तक आँखों में सपना है,
तब तक मंज़िल की चाह रहे।

"और जब सफ़र थककर ठहर जाए,
तो बस इतना याद रहे
हमने दिल से जिया था,
हमने उम्मीद से जिया था…"

"मेरा भी एक वक़्त था,
और तेरा भी एक वक़्त
बात तो बस बात है…
जब तक चला, तब तक चला।"
-आचार्य अमित
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile