गहरे सन्नाटे की आवाज़
"इन दिनों दर्द का इज़ाफ़ा ही हुआ,
तंगदिली में तंग और दिल हुआ।
न शब्द, न कोश,
न हौसला, न जोश,
चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा,
और इस सन्नाटे में खामोश बुत बने लोग।
न असर, न बशर,
न शाम, न शहर,
न बागों की ताबेदारी,
और न दूर कोई शजर।
कोने में किसी लुपका (छिपा) हुआ,
किसी की दुआओं का असर...
करता रहा है अब तक,
इस बुरे असर को बे-असर।"
— आचार्य अमित