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गहरे सन्नाटे की आवाज़

                
                                                         
                            गहरे सन्नाटे की आवाज़
                                                                 
                            

"इन दिनों दर्द का इज़ाफ़ा ही हुआ,
तंगदिली में तंग और दिल हुआ।
न शब्द, न कोश,
न हौसला, न जोश,
चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा,
और इस सन्नाटे में खामोश बुत बने लोग।
न असर, न बशर,
न शाम, न शहर,
न बागों की ताबेदारी,
और न दूर कोई शजर।
कोने में किसी लुपका (छिपा) हुआ,
किसी की दुआओं का असर...
करता रहा है अब तक,
इस बुरे असर को बे-असर।"
— आचार्य अमित
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37 मिनट पहले

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