तुम मुझे फिर मिलना
तबलें की ताल बनकर
वीणा की झंकार बनकर
दुःख में सुख बनकर
बारिश में छाता बनकर
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तुम मुझे फिर मिलना
किसी कविता की
अविस्मरणीय पंक्तियाँ बनकर
प्रेम पर आधारित किसी
उपन्यास का विराम बनकर
सुबह-सुबह घास पर तुहिन-कण बनकर
पक्षियों के वृंद का कलरव बनकर
तुम मुझे फिर मिलना
प्यार बनकर,अहसास बनकर
गीत-संगीत बनकर
निद्रा में स्वप्न बनकर
न मिलना सरपट दौड़ती
गाड़ी की गति बनकर
बल्कि मिलना
कछुए की चाल बनकर
और मिलना
मृत्यु के निकट
मेरी अंतिम इच्छा बनकर।।
परिचय : आमिर विद्यार्थी
नई दिल्ली
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