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समय और सपना -अमर त्रिपाठी

Amar Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल भी तरसता था, आज भी तरसता हूँ,
        
                                                    
                            
कल छोटी-छोटी खुशियों को, आज बड़े सपनों को तरसता हूँ।

वक्त बदला, हालात बदले, मगर चाहत वही रही,
मंज़िलें बदलती रहीं, मगर हौसलों की राह वही रही।

कल जेब छोटी थी, तो सपनों का आसमान भी छोटा था,
आज आसमान बड़ा है, तो ख्वाबों का कारवाँ भी बड़ा है।

जो मिला, उसे अपना समझकर दिल से स्वीकार किया,
जो नहीं मिला, उसके लिए फिर से प्रयास किया।

वक्त चाहे जितना बदले, उम्मीद का दीप जलता रहेगा,
अमर त्रिपाठी का सफर अभी बाकी है,
कहानी अभी बाकी है, और सपना अभी बाकी है।
18 घंटे पहले
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