कल भी तरसता था, आज भी तरसता हूँ,
कल छोटी-छोटी खुशियों को, आज बड़े सपनों को तरसता हूँ।
वक्त बदला, हालात बदले, मगर चाहत वही रही,
मंज़िलें बदलती रहीं, मगर हौसलों की राह वही रही।
कल जेब छोटी थी, तो सपनों का आसमान भी छोटा था,
आज आसमान बड़ा है, तो ख्वाबों का कारवाँ भी बड़ा है।
जो मिला, उसे अपना समझकर दिल से स्वीकार किया,
जो नहीं मिला, उसके लिए फिर से प्रयास किया।
वक्त चाहे जितना बदले, उम्मीद का दीप जलता रहेगा,
अमर त्रिपाठी का सफर अभी बाकी है,
कहानी अभी बाकी है, और सपना अभी बाकी है।