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क़दम क्यों लड़खड़ाते हैं तुम्हारे।

Alokji Shastri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुहब्बत की कोई तासीर है क्या।
        
                                                    
                            
किसी की ये कभी जागीर है क्या।।

वो कब घायल हुआ था जानते हो।
कहीं उनकी नज़र में तीर है क्या।।

किसी की याद में गुमसुम हो ऐसे।
कहीं कुछ मामला गंभीर है क्या।।

क़दम क्यों लड़खड़ाते हैं तुम्हारे।
गले में इश्क़ की जंजीर है क्या।।

तुम्हें देखूं तुम्हें छू लूं कभी मैं ।
मगर ऐसी मेरी तक़दीर है क्या।।
-आलोक रंजन त्रिपाठी
एक महीने पहले
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