धीरे धीरे जिंदगी तमाम हो रही
लोग कह रहे हैं देखो शाम हो रही
बात कोई उसने किसी कान में कही
बात वही आज सरे आम हो रही
इस तरह से इश्क उसका हुआ मुकम्मल
राधा श्याम रंग में घनश्याम हो रही
रांझा छा रहा जेहन में हीर के कहीं
मन के नगर में जो धूमधाम हो रही
आलोक पास आके फिर ये जाते ही नहीं
जिंदगी ग़मों का ही गोदाम हो रही
-आलोक