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आलोक पास आके फिर ये जाते ही नहीं

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धीरे धीरे जिंदगी तमाम हो रही
        
                                                    
                            
लोग कह रहे हैं देखो शाम हो रही

बात कोई उसने किसी कान में कही
बात वही आज सरे आम हो रही

इस तरह से इश्क उसका हुआ मुकम्मल
राधा श्याम रंग में घनश्याम हो रही

रांझा छा रहा जेहन में हीर के कहीं
मन के नगर में जो धूमधाम हो रही

आलोक पास आके फिर ये जाते ही नहीं
जिंदगी ग़मों का ही गोदाम हो रही
-आलोक
11 घंटे पहले
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Prasoon Saxena

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