विज्ञापन

जिधर भी इन बादलों के निवास हैं

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहने को यार तो अपने पचास हैं
        
                                                    
                            
मगर उनमें एक दो ही ज्यादा खास हैं

अंदाजा दूर पास का लगाओ इस तरह
जो दिल के करीब हैं वो ही पास हैं

महसूस करके देख लेना दिल को थाम के
नाजुक हैं फूल से भी यह जो अहसास हैं

क्वार महीने में अब चल दिये ये
जिधर भी इन बादलों के निवास हैं

आप किसी से भी कभी मिल के देखिये
हर शख्स के यहाँ अपने कयास हैं

कड़वी याद घुल गई उनके जेहन में
आलोक लग रहा है आज फिर उदास हैं
-आलोक
23 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile