कहने को यार तो अपने पचास हैं
मगर उनमें एक दो ही ज्यादा खास हैं
अंदाजा दूर पास का लगाओ इस तरह
जो दिल के करीब हैं वो ही पास हैं
महसूस करके देख लेना दिल को थाम के
नाजुक हैं फूल से भी यह जो अहसास हैं
क्वार महीने में अब चल दिये ये
जिधर भी इन बादलों के निवास हैं
आप किसी से भी कभी मिल के देखिये
हर शख्स के यहाँ अपने कयास हैं
कड़वी याद घुल गई उनके जेहन में
आलोक लग रहा है आज फिर उदास हैं
-आलोक
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