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अमावस में कातिक की कौतुक सा बरसे दीवाली है या ये उजालों की रानी

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं प्रीति का कोई उसका है सानी
        
                                                    
                            
मगन श्याम धुन में है मीरा दीवानी

बैठोगे सुनने समझ आयेगा सब
हर घर की होती यहाँ एक कहानी

बनकर सितारा चमकती गगन में
होती नुमाया मुझे मेरी नानी

हो भीड़ में तुम या तन्हाइयों में
रहतीं जेहन में ये यादें पुरानी

क्यों रूप का यूहीं अभिमान करना
ढलती है पल में ही सबकी जवानी

ग़म या खुशी में छलकने को आता
होता अजब ही ये नयनों का पानी

अमावस में कातिक की कौतुक सा बरसे
दीवाली है या ये उजालों की रानी

सदा स्वाद आलोक हर एक तरह के
चखाती कभी ना कभी जिंदगानी
-आलोक
22 घंटे पहले
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