कहे सरकार बुरी हैं।
रेल बनाती हमें बिठाती छुक-छुक भरती दम,
स्टेशन पर खड़े किनारे गुटका थूके हम।
कहे सरकार बुरी हैं।
इतिहासों के स्मारक पर पेंट कराती,
जब कला देखकर कला दिखाते,
लव यू लिखते हम।
कहे सरकार बुरी हैं।
मना थूकना, सरकारों ने लिखवाया जिस पर,
थूक-थूक कर मना मिटाया, थूक-थूक कर भर दिया।
कहे सरकार बुरी हैं।
हम सुधरेंगे जग सुधरेगा कहते रहते सब,
खुद बिगड़े ये बने हुए हैं देखो सब के सब।
कहे सरकार बुरी हैं।
डेढ़ अरब की आबादी, मोमबत्ती को जलाती,
सब नारी के लिए खड़े, तो वो क्यों डर जाती?
लिंक मांगते वीडियो की, स्टेटस पर आँखे नम।
सही नही अगर सरकार तो सही कहाँ हैं हम?
कहे सरकार बुरी हैं।
भ्रष्ट हुई सरकार पड़ी हैं, कुछ थोड़ी कुछ ज्यादा।
क्या जनता में बची हुई हैं, थोड़ी सी मर्यादा।
सरकार सही कर देने से क्या सोच सही ये होगी?
जनता कितनी बुरी, पता हैं वो आधे से ज्यादा।
कहे सरकार बुरी हैं।
कैंडल मार्च निकाली थी लाखों की आबादी में,
आबादी में देखो भैया कितने अपराधी थे।
अपराधों की सीमा पर कहाँ खड़े हैं हम?
थमता ना अपराध कहीं पर बस थमते हैं हम।
कहे सरकार बुरी हैं , कहे सरकार बुरी हैं।
-आलोक शर्मा