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दीवट में दिल के जला कर दिया एक

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तबस्सुम रूहानी नयन में सजाऊँ
        
                                                    
                            
कुछ इस तरह मैं दीवाली मनाऊँ

छू ने ना दूँ मैं निराशा को दामन
उम्मीद की लौ को मन में जलाऊँ

करना करम यूँ तू सब पर विधाता
किसी को जगत में दुखी ना मैं पाऊँ

मिल जाये मुझको सुधा रस सुखों का
तिश्नगी हर किसी की जहां में बुझाऊं

आयें बुरे दिन जीवन में कितने
तराना खुशी का यूँही गुनगुनाऊं

दीवट में दिल के जला कर दिया एक
आलोक अँधियार हर दिन मिटाऊं
-आलोक
59 मिनट पहले
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