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दीवट में दिल के जला कर दिया एक

                
                                                         
                            तबस्सुम रूहानी नयन में सजाऊँ
                                                                 
                            
कुछ इस तरह मैं दीवाली मनाऊँ

छू ने ना दूँ मैं निराशा को दामन
उम्मीद की लौ को मन में जलाऊँ

करना करम यूँ तू सब पर विधाता
किसी को जगत में दुखी ना मैं पाऊँ

मिल जाये मुझको सुधा रस सुखों का
तिश्नगी हर किसी की जहां में बुझाऊं

आयें बुरे दिन जीवन में कितने
तराना खुशी का यूँही गुनगुनाऊं

दीवट में दिल के जला कर दिया एक
आलोक अँधियार हर दिन मिटाऊं
-आलोक
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23 minutes ago

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