कह रहा है कोई हाये क्या ये कान में
रखिये घोल कर शहद अजी जुबान में
मेल मुलाकात तो खुद से भी कीजिये
यूँही भटकना भी क्या दुनियाँ जहान में
दिल को लग गई ये बात लाख टके की
ईश्वर की बसर ही तो है हर मुस्कान में
आसमाँ निहारते फूलों को देखिये
कसीदे पढ़ रहे हों सब रब की शान में
एक बात माननी तो होगी सभी को
जो लिखा है गीता में वही कुरान में
बचपन का कोई दोस्त काश कहीं आ मिले
याद ताजा दम हों चाय की दुकान में
आलोक तो हर रोज ही पलकों की कोर से
टांकते हैं अंजुमों को आसमान में
-आलोक