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क्या पता कि जहर पीने को मिले

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजब जिंदगी का भी अंदाज है
        
                                                    
                            
जो कल हो ना हो वो जो आज है

चिलमनें पलकों की भी छुपा ना सकीं
आँखों की इन तहों में जो भी राज है

लड़ रहे लोग सदियों से जिसके लिये
एक आफत के जैसा ही यह ताज है

क्या पता कि जहर पीने को मिले
अभी मीरा की उल्फत का आगाज है

जो तरक्की के रस्ते पे वो चल पड़ा
ये ज़माना क्यों उससे नाराज है

कहीं ख़ुदा तो नहीं दिल में आलोक के
बज रहा धड़कनों का मधुर साज है
-आलोक
8 घंटे पहले
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