अजब जिंदगी का भी अंदाज है
जो कल हो ना हो वो जो आज है
चिलमनें पलकों की भी छुपा ना सकीं
आँखों की इन तहों में जो भी राज है
लड़ रहे लोग सदियों से जिसके लिये
एक आफत के जैसा ही यह ताज है
क्या पता कि जहर पीने को मिले
अभी मीरा की उल्फत का आगाज है
जो तरक्की के रस्ते पे वो चल पड़ा
ये ज़माना क्यों उससे नाराज है
कहीं ख़ुदा तो नहीं दिल में आलोक के
बज रहा धड़कनों का मधुर साज है
-आलोक