विज्ञापन

ठंढी करवा दीं चिमनियाँ कारखानों की मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी कानपुर गौरव था भारत का,
        
                                                    
                            
कहा जाता था मैनचेस्टर भारत का।

मजदूरों पर निगाह पड़ी एक नेता की,
ठंढी करवा दीं चिमनियाँ कारखानों की।

मजदूर हैं वोट बैंक,
मिलता है आश्वासन।
होगा मिलों का पुनुरुद्धार,
पर हालात नहीं बदले।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर,कानपुर।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile