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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माता
        
                                                    
                            

जननी से माता बड़ी, जिसने पालन कीन्ह।

मातु यशोदा हर कंठ,देवकी जन्म दीन्ह।।

परिवर्तन

बदल रही है संस्कृती, बदल रहा है देश।

माता पिता देश में, बेटा बसा विदेश।।

कर्तव्य

मातु पिता सेवा नाहि , सेवा कैसे होय।
जैसा तेरा कर्म हो,फल मिलेगा सोय।।

कवि: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

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4 वर्ष पहले
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