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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समाज सेवा
        
                                                    
                            

समाज सेवा अति दुरूह , सबसे होती नाहि।
समाज सेवा जो करे , जन में आदर पाहि।।


मीडिया

चतुर्थ स्तम्भ जनतंत्र , मीडिया कहलाय।
निष्पक्ष संवाददाता , सबसे आदर पाय।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।



- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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