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भक्ति गीत

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे सजना हैं रूठे-रूठे ,मनाऊँ कैसे ?
        
                                                    
                            
मेरे सइयां बसे परदेश ,जाऊँ कैसे ?
मेरे बलमा की बड़ी-बड़ी अँखियाँ,
एक पल देखें मैं होऊँ निहाल।
मेरे सइयाँ की बड़ी-बड़ी बहियाँ ,
भर लेयँ अंक में ,होऊँ निहाल।
मेरे सइयाँ बसे परदेश ,
कैसे भेजूं संदेश ?
मेरे बलमा की अजब है चाल,
पल में नभ में ,पल में पताल।
मेरे बलमा के ऊँचे अवास ,
जाऊं कैसे ? मेरे सजना हैं ----
मेरी वाणी में कडुवे बोल ,बुलाऊँ कैसे ?
मेरी सूरत है रूप-कुरूप ,लुभाऊँ कैसे ?
सइयां का मारग बड़ा भयंकर,
पथ में कांटे, नुकीले हैं कंकर।
ऊबड़ -खाबड़ नदी और नाले,
चलत -चलत पड़ गये हैं छाले।
कैसे आकर मिलूँ मैं सइयां,
रूठे -रूठे मेरे हैं सइयां।
मुझ पातक पर कुछ दया करो
आकर दरस दिखाओ मेरे सइयां।
मेरे सजना हैं रूठे-रूठे ,मनाऊं कैसे ?
मेरे बलमा बसे परदेश, जाऊँ कैसे ?

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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