बेटियाँ बेटियाँ बेटियाँ बेटियाँ।
जुर्म कब तक सहेंगी बेटियाँ।।
घर से निकली होगी जब वो *ट्विंकल*,
खेलने का जुनू सिर पे होगा।
क्या खबर थी उसे इस धरा पर,
दरिंदों का भी यहाँ है समाँ।
बेटियाँ बेटियाँ..................।।
थोड़ी सहमी डरी थोड़ी होगी,
देखकर रूप उनका भयानक।
रक्षा कर ना सका जो तू मेरी,
किस बात का है तू खुदा।
बेटियाँ बेटियाँ..............।।
हाँथ तोड़ा और आंखें भी फोड़ी,
और ना जाने क्या जुर्म ढाये।
रूह तक काँप जाती है मेरी,
बेटी की सुनता जब दास्ताँ।
बेटियाँ बेटियाँ.................।।
छोटे कपड़ों की बात जो करते,
माँ ने रोकर जवाब दिया है।
ढाई साल की थी बच्ची मेरी,
कैसे पहनाती मैं साड़ियाँ।
बेटियाँ बेटियाँ.............।।
संविधान को साहब तुम बदलो,
और क्या देखना चाहते हो?
लाल किले पे वो दोनों झूलें,
चाहता है यह सारा जहाँ।
बेटियाँ बेटियाँ...............।।
वो क्या न्याय दिलाएंगे उसको,
जिसने बेटी का प्यार न जाना।
कल बेटी हमारी भी होगी,
बस *अखिलेश* ने है कह दिया।
बेटियाँ बेटियाँ...................।।
*स्वरचित~अखिलेश कुमार यादव*
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