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नौकरी मे वरिष्ठो का आधात

Akhil Dadhich

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कागज़ के टुकड़ों से मेरी,
        
                                                    
                            
प्रतिभा का नाप नहीं होगा,
संघर्षों से जो उपजा है,
उसका कोई पाप नहीं होगा।

मंचों से आज सुनाता हूँ,
मैं स्वाभिमान की वह गाथा,
जो कठिन समय के आगे भी,
झुकने न देगी यह माथा!

यदि रुद्ध हुआ जीविका-पथ,
तो यह न गति का अंत समझ,
निषाद के इस तम-कुहासे में,
निज सामर्थ्य का संत समझ।

कागज़ के क्षुद्र वृत्त पर,
तव मूल्य अंकित हो न सका,
जो तेज छिपा है वक्ष बीच,
वह हताशा से खो न सका!

यह व्यवधान न विराम तेरा,
यह केवल शक्ति-संचय है,
संघर्षों की इस ज्वाला में,
तपकर ही खिलता अभय है।

किसी संस्था की परिधि बीच,
जो सीमित हो न पाए कभी,
वह प्रतिभा तव स्वाधीन रहे,
न किसी अनुग्रह की दास कभी!

परिताप न कर इस विफलता पर,
यह समय-चक्र का फेर मात्र,
तू केवल क्षुद्र न याचक है,
तू तो महा-सृजन का पात्र मात्र।

घनघोर घटाओं को चीरकर,
नव-अरुणोदय मुस्कान भरे,
तव स्वेद-कणों की हर बूँद,
स्वर्णिम इतिहास का निर्माण करे!

उत्तिष्ठ! सँभालो आत्म-बल,
निराशा के तम को बेध डाल,
तव दृढ़ संकल्पों के आगे,
स्वतः नतमस्तक हो यह काल।

जीविका मात्र एक साधन है,
तू स्वयं सिद्धि का आधार है,
तेरी अस्मिता की सीमा न कोई,
तू अनत पुरुषार्थ का आगार है!
एक महीने पहले
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