विज्ञापन

क्या यह पहली मुलाक़ात ही मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?

अजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या यह पहली मुलाक़ात ही मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?
        
                                                    
                            

क्या यह पहली मुलाक़ात ही
मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?
ख़्वाबों के बंद लिफ़ाफ़े में
अरमानों की कैसी बरसात है?

अरमानों के वो सारे ख़त
कहीं आज ही खुल न जाएँ,
दिल में छुपे वो सारे जज़्बात
कहीं आज ही खुल न जाएँ।

यादों की वो सारी कच्ची चिट्ठियाँ,
जिन्हें दिल ने छुपाकर रखा है,
क्या आज ज़माने के सामने
उनका हर राज़ खुल जाना है?

क्या यह पहली मुलाक़ात ही
मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?

मोहब्बत के जिन रंगों में
रंगने का ख़्वाब सजाया था,
तेरे साथ ज़िंदगी जीने का
जो सपना दिल ने सजाया था,

क्या आज वही सपना
रेत की तरह फिसल जाना है?
क्या हाथों में आया हुआ
सब कुछ हाथों से निकल जाना है?

दिल में दबाकर रखी
उन सारी चाहतों का,
जिन्हें कभी कह न सके हम,
उन सारी मोहब्बतों का,

क्या आज खुल्लम-खुल्ला
तमाशा बन जाना है?
क्या आज मेरे दिल का हर राज़
ज़माने को बताना है?

क्या ज़लील होने की
सारी हदें पार करनी हैं?
क्या अपनी ही मोहब्बत के लिए
आज खुद से हारनी है?

क्या यह पहली मुलाक़ात ही
मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?
क्या मेरे सारे ख़्वाबों की
आज आख़िरी रात है?

क्या यह पहली मुलाक़ात ही
मेरी आख़िरी मुलाक़ात है?
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile